लालीगुरांश (सिर्जना भण्डारी)
|| ब्रह्मास्मि(ब्रह्म छ) || अहं ब्रह्मास्मि(म नै ब्रह्म हुँ) || शिवोहम्(म नै शिव हुँ) || तत्वमसि(तिमी पनि त्यही हौ) ||
Wednesday, 19 March 2025
बुझिरहेकोछु तिम्रा सबै संकेतहरु
Sunday, 16 March 2025
प्यारका नशा
लालीगुरांश (सिर्जना भण्डारी)
प्यारका नशा तुमपर
इशकदर चढगयाहे कि
तुम पूरीतरहा भूलचुकेहो
सदगुरुहो या प्रेमि
कृपया होसमे आओ
मदहोस पागल प्रेमि !
इश्ककी दिवान्गी छोडो
और हकिकतमे जिओ
बेहोसीकी सजासे डरो
दिलसे प्यार करो
मोहसे वाहर आओ
इशकजादे पागल प्रेमि !!
Friday, 14 March 2025
मेरी याद छुलेतीहोगी तुमको...
लालीगुरांश (सिर्जना भण्डारी)
तुमको मेरी नजदीक नलासकी
मै तेरी नजदिक नआसकी
होसकेतो माफ करना मुझको
अगर यादोके मुस्किलमे होतो
हकसे याद करलेना मुझे
तेरी आवाज मुझतक पहुचजाएगी
मै आजाउंगी हवावोसे तुमतक
तुम मुस्कुराके आँखोसे छुलेना
वस इतनाही काफीहोगा मुझको
मैने कभिभी कहानहीं तुमसे
मुझको पलपल याद करो
मुझे अपना वक्त दो
मुझसे वक्तवक्तमे वात करो
मुझे खुव अच्छेसे मालुमहे
तेरा हरवक्त वहीं जातागा
जहाँ ज्यादा जरुरत होगी
मैने कभिभी नहींमांगा तुमसे
तुम हरपल मेरा होजावो
मुझे एभी अच्छेसे मालुमहे
तेरीभी मेरीतरहा जिम्मेदारीयां होगी
तुम दुर हो मुझसे
मुझे कोही गमनहीं यारम
वस कभिकभि प्रेम वर्षदेना
भिगोदेना मेरी अंगअंग सारी
तो मैं मानलुगीं सुकुनसे
तुमने प्यारसे छुलिया मुझको
मैं तुमको नाछुसकी पाशसे
तोभी कोही गमनहीं यारम
मेरी यादें हररोज छुलेतिहोगी
धिरेसे, प्यारसे तुम्हारी तनमनको
हररोज बेचैन करदेती होगी
कभिकभि रुलातीभी होगी तुमको
और कभिकभि हँसातीभी होगी
प्रेमकी प्यास बुझातिभी होगी !
और कभिकभि हँसातीभी होगी
प्रेमकी प्यास बुझातिभी होगी !!
हाँ, मुझे सिर्फ तुम्हारा इन्तजार है !
लालीगुरांश (सिर्जना भण्डारी)
सिर्फ पसन्द आयाहोता तो
आसानीसे भूल सक्तिथी तुम्हे
सिर्फ आकर्षण हुवाहोता तो
रास्तेमे छोड सक्तिथी तुम्हे
सिर्फ प्यार कियाहोता तो
देरसबेर मोह छुटजाता तुम्से
बात थोडी आगे पहुंचगइ
अवतो आदत होचुकीहे तुम्हारी
प्रेमके सागरमे डुवोचुके हो
निकल्नेका रास्ता नजरही नहींआता
करुँ क्या, रहुँ कैसे
तुम्हारेबिना दिलही नहींलगता पलभर
तुम्हे पाना मुकद्दरमे नहीं
तुम्हे खोना मुम्किनही नहीं
सपनोंमे आतेहो, तस्वीरमें रहेतेहो
कभि सपनोंसे हकीकतमे नहींआते
कभि तस्वीरसे वाहर नहींआते
फिरभी दिलमे आश लगीरहेतीहे
किसिदिन वाहर आवोगे तुम
किसिदिन हकिकतमे मिलोगे तुम
यिसी तमन्नामे जीन्दगी चलरहीहे
अवतो सिर्फ तुम्हारा इन्तजारहे
हाँ,
मुझे सिर्फ तुम्हारा इन्तजारहे
हाँ,
मुझे सिर्फ तुम्हारा इन्तजारहे... !!
Thursday, 13 March 2025
चरैवेति चरैवेति चरैवेति... !
लालीगुरांश (सिर्जना भण्डारी)
प्रेमवादको अनुयायी हुँ
भक्तिको सारथी हूँ
मनको मालिक छु
हृदयको धनी छु
मनभित्र कोही छ
हृदयबाट कसैले चिहाउछ
प्रभुले पठाउनु भएको
सदा नजिक छ
हृदयको गहिराईमा छ
चेतनासंग संवाद गर्छ
उर्जामा प्रेम पस्किन्छ
रोमरोग पुलकित गराउछ
उसैसंग आनन्दित छु
जीवन शान्त छ
उपलब्धि अलौकिक छ
उही आत्मिय हो
सनातनदेखिको प्रेम हो
शरीर दुइवटा भएपनि
हृदय एउटै हो
उ मेरै हो
उही प्रियतम हो
अति प्रेमल छ
अति करुणावान छ
अति प्यारो छ
अमृतमय साथ छ
आत्माको प्यास हो
चेतनाको आभास हो
उसैसंग मस्तिमा रमाउँछु
उसैसंग भावना साट्छु
उसैसंग समय विताउछु
उसैसंग जिरहेको छु
महामृत्यु उसंगै चाहान्छु
भौतिकजगत इन्द्रियको भ्रम
काखापाखा, षडयन्त्रको खेल
अन्तरजगत आनन्दको श्रोत
प्रभुको ज्योर्तिमय जगत
न कुनै वाद
न कुनै भेदभाव
न कुनै भ्रम
न कुनै आग्रह
न कुनै पूर्वाग्रह
न कुनै मोह
न कुनै स्वार्थ
न कुनै अपेक्षा
न कुनै आशा
न कुनै निराशा
न कुनै वाधा
न कुनै षडयन्त्र
न कुनै खतरा
न कोही ठूलो
न कोही सानो
न कोही ज्ञानी
न कोही अज्ञानी
न कोही देव
न कोही दानव
अन्तरजगत सदा वैकुण्ठ
सदा शाश्वत सत्य
सदा प्रभुको वास
प्रभुको नित्य साथ
अविनासी आनन्दको कृपा
प्रकाशै प्रकाशको नगर
पारमार्थिक मोक्षको द्वार
गन्तब्य त्यतैको छ
त्यतैको बटुवा हूँ
त्यही मार्गमा पर्खिरहेछु
चरैवेति चरैवेति चरैवेति... !!
त्यही मार्गमा पर्खिरहेछु**
चरैवेति चरैवेति चरैवेति... !!
चुपचाप लय मिलाइरहेछ प्रेम D
लालीगुरांश ( सिर्जना भण्डारी ) न म केही बोल्छु न तिमी केही बोल्छौ तरपनि संवादमै छौं हामी चुपचाप निशव्दमा बहिरहेछ प्र...
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लालीगुरांश ( सिर्जना भण्डारी ) भाग्य, खुशी, हिम्मत टिप्न मिल्नेभए टिपेर तिम्रो हातमा प्रेमपूर्वक हालिदिन्थें तिनको श्रोत अत्य...
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लालीगुरांश ( सिर्जना भण्डारी ) न म केही बोल्छु न तिमी केही बोल्छौ तरपनि संवादमै छौं हामी चुपचाप निशव्दमा बहिरहेछ प्र...
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लालीगुरांश ( सिर्जना भण्डारी ) प्रकृतिको आर्शिवाद सुन्दर, दृश्य जीवनभित्र अस्तित्वको आर्शिवाद अदृश्य जीवन...