लालीगुरांश (सिर्जना भण्डारी)
मुझमे
तुमहीतुम हो
में
कहीं नहीं
जिधर
भी देखुं
तुमहीतुम
नजर आते हो
मेरी
बातोमे तुम
मेरी
यादोमे तुम
मेरी
रातोमे तुम
मेरी
बाहोमे तुम
मेरी
निदोमे तुम
मेरी
सपनोमे तुम
मेरी
कल्पनामे तुम
मेरी
ध्यानमे तुम
मेरी
साक्षीमे तुम
मेरी
हरकदममे तुम
मेरी
आदिमे तुम
मेरी
अन्तमे तुम
मेरी
आगेभी तुम
मेरी
पिछेभी तुम
मेरी
दाएंभी तुम
मेरी
बाएंभी तुम
मेरी
दिनमे तुम
मेरी
रातोमे तुम
मेरी
हरखुशीमे तुम
मेरी
हरगममे तुम
मेरी
फासलोमे तुम
मेरी
नजदिकीमे तुम
मेरी
आँखोमे तुम
मेरी
हरनजारोमे तुम
मेरी
पनाहोमे तुम
मेरी
निगाहोमे तुम
मेरी
राहो तुम
मेरी
श्रद्धामे तुम
मेरी
प्रेममे तुम
मेरी
भक्तिमे
मेरी
कामनामे तुम
मेरी
लोभमे तुम
मेरी
मोहमे तुम
मेरी
क्रोधमे तुम
मेरी
उदाषीमे तुम
मेरी
खुशीमे तुम
मेरी
खुस्बुमे तुम
मेरी
संगीतमे तुम
मेरी
सरगममे झंकारमे तुम
मेरी
नृत्यमे तुम
मेरी
तालमे तुम
मेरी
रागमे तुम
मेरी
जलमे तुम
मेरी
आकाशमे तुम
मेरी
तरगंमे तुम
मेरी
प्रकाशमे तुम
मेरी
उजालेमे तुम
मेरी
अंधेरेमे तुम
मेरी
हरइशारोमे तुम
मेरी
हरतरफ तुम
तुमबिन
कोही नहीं
तुमबिन
कुछ नहीं
तुम
ही तुम
वस
तुमहीतुम हरपल
खुद
परमात्मा तुम
निर्गुण
सर्बात्मा तुम
इसलिए
हरजगह तुम
तुम
ही तुम
बस
तुमहीतुम
मुझमे
तुमहस् तुम हो,
मै
तो कहीं भी
नहीं हुँ
मे
हुँभी तो मै भी
तुम ही हुँ
तेरी
अस्तित्वसे जुडाी हुँ
मे
तेरी अंश हुँ
मे
तुम हि हुँ
तुम
मे हो
अहं ब्रह्मास्मि
तत्वमसि !!
19 may 2024
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